सर्वे भवन्तु सुखिन:
सर्वे सन्तु निरामया:।
सर्वे भद्राणि पश्यन्तु।
मा कश्चित् दु:खभाग भवेत् ।।
Happiness be unto all.
Perfect health be unto all.
May all see what is good.
May all be free from suffering.
 
Swami Yogeshwaranand Ji Paramahans
 
अयन्तु परमो धर्मो यत् योगेनात्मदर्शनम् ।।१।।
न योगात् परमपुण्यं न योगात्परं शिवम् ।
न योगात् परं शान्तिर्न योगात्परमंसुखम् ।।२।।
ज्ञानं तु जन्मनैकेन योगादेव प्रजायते ।
तस्मात् योगात्परतरो नास्ति मार्गस्तु मोक्षद: ।।३।।
योग के द्वारा आत्मदर्शन सबसे बड़ा धर्म है।
योग से बढ़कर न कोई पुण्य है, न कल्याणकारी वस्तु, न शान्ति और न कोई परम सुख है ।
योग के द्वारा तो एक जन्म में ही ज्ञान हो सकता है अतएव योग से बढ़कर मोक्षदायक अन्य कोई मार्ग नहीं है ।
Updated 8-June-2014
by Tejinder Singh